Sunday, November 29, 2009
अपनी अपनी सोच
एक बार हम दोस्ते-दोस्ते मिल के मन्दिर गयी,वहां हमने भगवान को प्रसाद चढाया| सब अपनी मस्ती में गुम थे, वहा बैठे तमाम भिखारी को सबने प्रसाद दिया और आगे बढ़ गयी मै पीछे थी मेरी निगाह एक ऐसे भिखारी पर पड़ी जिसके हाथ नहीं था ( ऐसा नहीं था कि उनने उस भिखारी को नहीं देखा पर उसे देख कर वो बोली अरे इसके तो हाथ ही नहीं इसको प्रसाद केसे दू इसका तो कटोरा भी नहीं ये कहकर वो हंसकर आगे बढ़ गयी)मेरी निगाह उसी भिखारी पर अटक गयी मै उसके पास तक गयी उसे देखकर बोली प्रसाद ---- ये कहकर उसकी तरफ देखा उसने शाल से अपना कटा हाथ निकला जो कोहनी से थोडा ऊपर तक नहीं था मैने उसके उसी हाथ पर प्रसाद रख दिया उसने दुसरे कटे हाथ की सहायता से उस प्रसाद को अपने मुख में डाल लिया| जब तक मैंने सडक पार की वो मुझे मैं उसे देख रहे थे| उसे प्रसाद खिला कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई मेरी दोस्ते को मैं पागल लगी ये पागल पन मुझे अभी भी याद है और अभी भी मैं ये पागल पन करती हु|
Thursday, November 26, 2009
कांच और दिल
कांच के टूटने की आवाज होती है|
दिल के टूटने की नहीं|
टुटा हुआ कांच सबको दिख जाता है,
टुटा हुआ दिल किसी-किसी को ही -
दिखता है|
दिल के टूटने की नहीं|
टुटा हुआ कांच सबको दिख जाता है,
टुटा हुआ दिल किसी-किसी को ही -
दिखता है|
Tuesday, November 24, 2009
कुछ नही रखा सिर्फ़ दिल लगाने में
बहुत कुछ है इस जमाने में -
कुछ नहीं रखा सिर्फ दिल लगाने में|
लगा के दिल,आखो को रुलाओगे-
खुद को भी ढूढ़ नहीं पाओगे|
ना आस पास किसी को पाओगे|
तब ज़माने की याद आएगी-
दिल से बड़ा दर्द नज़र आएगा-
फिर खुद को जान पायेगा|
उठा के कदम जब बढाओगे|
कोई ना कोई मिल जाएगा,
दर्द बाटने के लिए|
कुछ नहीं रखा घुट घुट के जिए जाने में
बहुत कुछ है इस जमाने में
कुछ नहीं रखा सिर्फ दिल लगाने में|
लगा के दिल किसने क्या पाया है ,
लगा के दिल अपनों को भुलाया है|
दिल ने दिल को जब-जब ठुकराया है,
ज़माने से कोई एक साथ आया है|
कुछ नहीं कीमत यहाँ दिले-जज्बात की,
कीमत है जमाने में हर एक बात की|
विरले ही दिल को दिल से पढ़ पाते है,
लाखो में एक दिल को दिल से चाहते है|
हर किसी को सज़ा मिलती है दिल लगाने की-
फिर क्या फायदा दिल को तडपाने से -
बहुत कुछ है इस जमाने में -
कुछ नही रखा सिर्फ़ दिल लगाने में
कुछ नहीं रखा सिर्फ दिल लगाने में|
लगा के दिल,आखो को रुलाओगे-
खुद को भी ढूढ़ नहीं पाओगे|
ना आस पास किसी को पाओगे|
तब ज़माने की याद आएगी-
दिल से बड़ा दर्द नज़र आएगा-
फिर खुद को जान पायेगा|
उठा के कदम जब बढाओगे|
कोई ना कोई मिल जाएगा,
दर्द बाटने के लिए|
कुछ नहीं रखा घुट घुट के जिए जाने में
बहुत कुछ है इस जमाने में
कुछ नहीं रखा सिर्फ दिल लगाने में|
लगा के दिल किसने क्या पाया है ,
लगा के दिल अपनों को भुलाया है|
दिल ने दिल को जब-जब ठुकराया है,
ज़माने से कोई एक साथ आया है|
कुछ नहीं कीमत यहाँ दिले-जज्बात की,
कीमत है जमाने में हर एक बात की|
विरले ही दिल को दिल से पढ़ पाते है,
लाखो में एक दिल को दिल से चाहते है|
हर किसी को सज़ा मिलती है दिल लगाने की-
फिर क्या फायदा दिल को तडपाने से -
बहुत कुछ है इस जमाने में -
कुछ नही रखा सिर्फ़ दिल लगाने में
Tuesday, October 27, 2009
सुन्दरता मत खराब करो
Monday, October 26, 2009
माँ की ममता
Tuesday, September 29, 2009
मेरी नज़र में दिल
दिल के टूटने की आवाज नहीं होती,
लेकिन चोट बहुत गहरी होती है|
इस चोट से कुछ सम्भल जाते है,
कुछ को ये चोट बर्दाश्त नहीं होती|
लाखो में कोई एक चेहरा-
मन को भाता है|
हर तरफ आखो को फिर-
वही नजर आता है|
यू तो प्यार हर कोई करता है,
लेकिन प्यार को प्यार कोई-कोई करता है|
यू तो हर कोई हर किताब पढ़ सकता है-
लेकिन दो किताब कोई -कोई ही पढ़ सकता है-
उन किताब के नाम है- प्यार, दिल|
खूबसूरती उपहार में नहीं देने वाले के-
दिल में होती है जिसका दिल जितना सुंदर,
होगा उसका उपहार उतना ही खूबसूरत होगा|
लेकिन चोट बहुत गहरी होती है|
इस चोट से कुछ सम्भल जाते है,
कुछ को ये चोट बर्दाश्त नहीं होती|
लाखो में कोई एक चेहरा-
मन को भाता है|
हर तरफ आखो को फिर-
वही नजर आता है|
यू तो प्यार हर कोई करता है,
लेकिन प्यार को प्यार कोई-कोई करता है|
यू तो हर कोई हर किताब पढ़ सकता है-
लेकिन दो किताब कोई -कोई ही पढ़ सकता है-
उन किताब के नाम है- प्यार, दिल|
खूबसूरती उपहार में नहीं देने वाले के-
दिल में होती है जिसका दिल जितना सुंदर,
होगा उसका उपहार उतना ही खूबसूरत होगा|
Thursday, September 24, 2009
कुछ मेरी सुनो
इन्सान को इन्सान समझा जाय,
उसके दर्द को दर्द|
किसी को रूपये से ना तोला जाय,
यानि रूपये से बड़ा ना समझा जाय|
उसके गुण से उसे तोला जाए|
भगवान को भोग लगना जरूरी है -
लेकिन भूखे को भोजन करना-
उससे जरूरी है|
हम सब अपने आप को सुधार ले सब ठीक हो जायेगा|
हर कोई दुसरे की भावनाओं को समझे -
अपनी बात दुसरे पे ना थोपे|
दुसरे की गरीबी का मजाक ना उडाये
रुपया किसी का मित्र नही|
रंग रूप पर घमंड ना किया जाय,
कभी भी कुछ हो सकता है|
हर एक बात दिमाग के साथ साथ,
दिल से भी सोचे|
प्यार को किसी धर्म से ना जोड़े
प्यार का रंग रूप एक है|
सभी से प्यार करे और प्यार,
करने वालो की कद्र करे-
प्यार को जाति-धर्म से ऊपर
उठ कर देखे|
हर और शान्ति हो जायेगी|
उसके दर्द को दर्द|
किसी को रूपये से ना तोला जाय,
यानि रूपये से बड़ा ना समझा जाय|
उसके गुण से उसे तोला जाए|
भगवान को भोग लगना जरूरी है -
लेकिन भूखे को भोजन करना-
उससे जरूरी है|
हम सब अपने आप को सुधार ले सब ठीक हो जायेगा|
हर कोई दुसरे की भावनाओं को समझे -
अपनी बात दुसरे पे ना थोपे|
दुसरे की गरीबी का मजाक ना उडाये
रुपया किसी का मित्र नही|
रंग रूप पर घमंड ना किया जाय,
कभी भी कुछ हो सकता है|
हर एक बात दिमाग के साथ साथ,
दिल से भी सोचे|
प्यार को किसी धर्म से ना जोड़े
प्यार का रंग रूप एक है|
सभी से प्यार करे और प्यार,
करने वालो की कद्र करे-
प्यार को जाति-धर्म से ऊपर
उठ कर देखे|
हर और शान्ति हो जायेगी|
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