प्यार के सागर में डूबे हुए है,
फिरभी पूरे सूखे हुए है |
ना समझेगे वो बात हमारी-
खुद जो अपने में उलझे हुए है |
शहद से मीठे है सभी के लिए जो
नीम वो मेरे लिए बने हुए है |
यू तो बरसते है बादल हर जगह -
रेगिस्तान धरती पे भरे हुए है |
आसू वो सभी कों दिखाते नही है -
दिलो पे जो चोट लिए हुए है |
क्यों रोज बहाती है आसू चांदनी -
पत्तो के दिल पथराये हुए है |
प्यार कों प्यार सब समझते नही है ,
कुछ ही लोग पगलाए हुए है |
Tuesday, December 7, 2010
Monday, December 6, 2010
कल्पना
अपने है, सपने है और कल्पना है -
इन्ही से दिल लगाना ,
इन्ही में रंग भरना है |
अपने दर्द देते है -
सपने छोड़ चल देते है |
कल्पनाएँ हमे हसाती है -
अपने संग उड़ाती है |
नही छोडती साथ कभी भी -
हमेशा साथ निभाती है |
कल्पना में रहती हु -
उनके संग बहती हु |
इन्ही से दिल लगाना ,
इन्ही में रंग भरना है |
अपने दर्द देते है -
सपने छोड़ चल देते है |
कल्पनाएँ हमे हसाती है -
अपने संग उड़ाती है |
नही छोडती साथ कभी भी -
हमेशा साथ निभाती है |
कल्पना में रहती हु -
उनके संग बहती हु |
Thursday, December 2, 2010
दिल कों बचाना है
विश्वाश टूटने पर दिल कों बहुत निराशा होती है लेकिन ये भी एक सीख होती है |
दोस्त अब किसी को बनाना नहीं है ,
दिल को और अब समझाना नहीं है |
सपने है अपने है और है कल्पना -
किसी की बातो में अब आना नही है |
मेरा दिल मुझे रुलाता है बहुत -
फिरभी दिल को मुझे भुलाना नहीं है |
हर बार दिल को एक सीख मिल रही -
दिल को दर्द से अब बचाना नहीं है |
बिना दिल के लोग, इसी लिए है रोग
हमे दिल में रोग लगाना नहीं है |
दिल चेहरे का एक आइना है -
नकाब इस पर मुझे चढ़ाना नहीं है |
दिल की जगह पम्प हो रहे है -
हमे दिल को पम्प बनाना नहीं है |
दोस्त अब किसी को बनाना नहीं है ,
दिल को और अब समझाना नहीं है |
सपने है अपने है और है कल्पना -
किसी की बातो में अब आना नही है |
मेरा दिल मुझे रुलाता है बहुत -
फिरभी दिल को मुझे भुलाना नहीं है |
हर बार दिल को एक सीख मिल रही -
दिल को दर्द से अब बचाना नहीं है |
बिना दिल के लोग, इसी लिए है रोग
हमे दिल में रोग लगाना नहीं है |
दिल चेहरे का एक आइना है -
नकाब इस पर मुझे चढ़ाना नहीं है |
दिल की जगह पम्प हो रहे है -
हमे दिल को पम्प बनाना नहीं है |
Monday, May 24, 2010
Saturday, May 22, 2010
विश्वाश
दिल टूटने की आवाज नहीं होती,
आखे जरुर नम होती है|
दिल टूटने पर हम सम्भल जाते है,
विस्वाश टूटने पर हम टूट जाते है|
कोशशि ये होनी चाहिए की दोस्ती हो
या प्यार विस्वाश ना टूटे|
यही इंसानियत है मेरी नजर में|
आखे जरुर नम होती है|
दिल टूटने पर हम सम्भल जाते है,
विस्वाश टूटने पर हम टूट जाते है|
कोशशि ये होनी चाहिए की दोस्ती हो
या प्यार विस्वाश ना टूटे|
यही इंसानियत है मेरी नजर में|
Thursday, May 13, 2010
दोस्ती को खेल मत समझो
दोस्ती कभी भी किसी से हो सकती है आज के समय में दोस्ती भी लोग मतलब से करते है जबकि मै सोचती हु मतलब से की गयी दोस्ती,दोस्ती नही होती|जो लोग बिना सोचे दोस्ती शब्द को इस्तेमाल करते है वो लोग दोस्ती को खेल समझते है| क्या आप भी ऐसा सोचते है?
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