Saturday, March 7, 2009

आप सब की आलोचना,प्रशसा के लिय धन्यवाद| उम्मीद है आगे भी आप सब का सहयोग प्राप्त होता रहेगा| अपनी तरफ से मैं अच्छे से अच्छा लिखने की कोशिश करूंगी| आप सब लोगो ने मेरासवेरा के लिय जो समय निकला उसके लिय धन्यवाद|

Thursday, March 5, 2009

पाठको से निवेदन

मेरी रचनाओं में अभी गलतियाँ हो रही है जिसके लिए में माफी चाहती हूँ| आप लोगो के सहयोग से जल्दी ही अपनी गलतियाँ सुधार लूगी कृपया थोडा समय दीजिए|

फुलझडी

१. एक कुत्ता दुसरे कुत्ता का दर्द समझ जाता है,
पास बैठ सहलाता,दुम हिलाता है|
एक आदमी दुसरे आदमी का दर्द समझ,
नहीं पाता है,
पास से देख कर निकल जाता है सिर्फ,
बात बनाता है|
२. पराये फिर भी समझ जाते हैं,
अपने सिर्फ दर्द दे जाते है|
परायो को छोड़ना पड़ता हैं,
अपनों को भोगना पड़ता हैं |
३.प्यार चुंबन या मिलन नहीं,
प्यार कोई चुंभन नहीं,
प्यार एक कोरा कागज़ हैं,
जिसे प्यार ही समझ सकता हैं,
जिसमे कुछ लिखा नहीं लेकिन-
सब कुछ लिखा हैं जिसे प्यार ही पढ़ सकता हैं|

Monday, March 2, 2009

एक तमन्ना


एक तमन्ना उड़ मैं जाऊ,
नील गगन को छु के आऊ|
एक इच्छा ऐसी मन में,
छिपू किसी को नज़र न आऊ|
एक ख्वाहिश उठी है मन में,
ऐसी बिखरू सिमट न पाऊ|
एक तमन्ना ऐसी मन में,
ऐसी उलझू,उलझती जाऊ ,
किसी से सुलझ न पाऊ|
एक इच्छा जागी है मन में,
नये साचे में ढल के ऑऊ,
सबके मुख पे हंसी बन छाऊ,
आखिरी तमन्ना है इस मन की-
कली,झरना,बादल,तितली,
या फिर पर्वत बन जाऊ|
कली बन बाग़ महकाऊँ,
झरना बन बहती जाऊँ,
पर्वत बन स्थर हो जाऊँ|
हर किसी के काम मैं आऊँ|

savera

Tuesday, February 3, 2009

आया की मदद

स्कूल के दिनों की बात है।स्कूल में प्रार्थना का समय था। सभी लाइन में प्रार्थना के लिए खड़े थे। प्रार्थना खत्म होने के बाद जैसे ही मैंने आखे खोली मैंने देखा मेरी स्कूल की आया की चप्पल टूट गई थी। वो उसे जोड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बार-बार उसकी कोशिश नाकाम हो रही थी, मैं लगातार उसे देख रही थी, मुझसे रहा नही गया| मैंने क्लास टीचर से पूछे बिना लाइन से हट कर अपनी आया की चप्पल सेफ्टी पिन से जोड़ दी| उसने प्यार से मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई मैं बहूत खुश हुइ, सामने मेरी क्लास टीचर मुझे देख रही थी |
वो भी मुझे देख कर मुस्कुराई मैं क्लास की तरफ चल दी| क्लास टीचर ने कुछ नही कहा, मेरी सहेलियों को शायद ठीक नही लगा| अपनी आया की मदद करके मेरे दिल को खुशी हुई और क्या चाहिए|


फुलझड़ी

उदास
बहुत उदास हूँ मैं ,
ना जाने किसके साथ हूँ मैं
किसे खोजती हूँ ,
किसकी तलाश हूँ मैं|

दर्द
मर्द को भी दर्द होता है
वो साथ में नही, अकेले में रोता है |

सोना
सोना के बाप ने सोना को
सोने में लाद दिया ,
फिर भी ससुराल वालो ने
सोना को जिंदा जला दिया
सदा के लिए सुला दिया।