आज सारा भारत देश अन्ना जी के साथ है अन्ना जी की लोकप्रियता और लोगो का उत्साह देख कर ये अंदाजा सहज लगाया जा सकता है कि-आम जनता भ्रष्ट्राचार {बेईमानी } से कितनी परेशान हो चुकी है | सरकार ने अन्ना जी समेत जनता की आवाज को दबाने का पूरा प्रयास किया लेकिन सरकार को सच्चाई के सामने अपने घुटने टेकने ही पड़े आगे भी पड़ेगे ...
अन्ना जी जो सर से पांव तक मेहनत, ईमानदारी, सच्चाई, कर्मठता की मूर्ति है उन पर कांग्रेस के नेताओं ने अभ्रद भाषा का प्रयोग करते हुए अनेक लांछन लगाये है जिसके लिए उन्हें अन्ना जी के पैर पकड़ कर नाक{जो अब कांग्रेस के पास नहीं है } रगड़ कर माफी मागनी चहिये | हम सब भारत वासी अन्ना जी के लिए भगवान से प्रार्थना करते है कि भगवान जनता के भगवान और उनके सहयोगियों पर अपनी कृपा-द्रष्टि बनाये रखे |
जन-जन तुम्हारे साथ अन्ना -
अंग संग तुम्हारे भगवान है |
आगे बढ़ते जाना है अब -
मंजिल को अपनी पाना है |
बिछा रहे है शत्रु जाल अब -
डर कर कुछ है दब रहे |
रहना है होशियार अब -
सच्चाई का अब मान रहे |
कराना है अब पास बिल -
जन जन को ये ध्यान रहे |
जन- जन तुम्हारे साथ अन्ना -
अंग -संग तुम्हारे भगवान रहे |
आगे ---
कलयुग में बनकर राम अन्ना जी आये है |
बन कर कांग्रेसी रावण देखो कैसे आये है |
फैला रहे शत्रु जाल अपना, डरा रहे धमका रहे -
अब नहीं पीछे हटेगे उनको ये ध्यान रहे -
क्योकि -
शरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है -
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है |
Wednesday, August 17, 2011
Wednesday, June 15, 2011
छोटी सी बात मगर ....
एक लड़की एक लड़के के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठ कर जा रही थी | हाफ तंग टीशर्ट,नीचे तंग जींस जिस में से उस लड़की की पैंटी और आधे से ज्यादा कमर साफ नजर आ रहे थी , लड़की उस लड़के से चिपट कर बैठी थी | लाल बत्ती पर उस शो को सब देख रहे थे और में उन सब को देखते हुए उस गरीब लडकी को देख रही थी जिसे गरीबी ने इस कद्र तंग कर दिया था की उसके कपड़े फटे जा रहे थे | दोनों में बस इतना अंतर था एक शौक में और दूसरी मजबूरी में थी |
सब के लिए वो प्रदर्शन की वस्तु बने हुए थे मेरे मन में अनेक दर्शन के सवाल जाग गये |
सब के लिए वो प्रदर्शन की वस्तु बने हुए थे मेरे मन में अनेक दर्शन के सवाल जाग गये |
Friday, April 8, 2011
Thursday, March 31, 2011
खेल कों खेल रहने दो
कल भारत पाकिस्तान का मैच था {३० मार्च } लोग का जुनून पागल पन की हद पार करता दिखा | मीडिया और पेपर में देखन और पढने को मिला , कही हवन हो रहा है तो कही लोग अपने चेहरों पर झंडा जैसा रंग पुता कर चिल्ला चिल्ला कर भारत की जीत की कमाना कर रहे थे | कही जोर जोर से गाने लगाये जा रहे थे , तो कही पटाखों का शोर हर एक खिलाडी के आऊट होने पर हो रहा था | जब भारत जीता तो पटाखों के शोर ने कान फाड़ दिए | माना सालो बाद भारत विश्व कप के फाइनल में पहुचा है ख़ुशी की बात है लेकिन इस ख़ुशी को खेल के नजर से देखे ना कि भारत पाकिस्तान का मैच समझ कर |
मैच ख़त्म होने पर देर रात सडको पर शोर सुनाई देता रहा लडके अपनी धुनों में तेज़ रफ्तार अपनी बाइक पर सीटिया बजाते चिलाते रहे , बाइक की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि अगर सामने कोई आ जाए तो गया काम से | खेल के नशे में अपनी ज़िन्दगी से खेलना क्या सही है | अगर युवाओं में उत्साह ज्यादा हो गया है तो देश में उन मसलो में दिखाए जो जरूरी है जिसकी देश को जरूरत है | उन कामो में जोश दिखाए जिससे देश का नाम हो और उनका भी | भारत और पाकिस्तान के मैच को सिर्फ खेल की नजर से और अपनी नजर से देखे न कि किसी और नजर से | मै क्या कहना चाह रही हु आप समझते है |
मैच ख़त्म होने पर देर रात सडको पर शोर सुनाई देता रहा लडके अपनी धुनों में तेज़ रफ्तार अपनी बाइक पर सीटिया बजाते चिलाते रहे , बाइक की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि अगर सामने कोई आ जाए तो गया काम से | खेल के नशे में अपनी ज़िन्दगी से खेलना क्या सही है | अगर युवाओं में उत्साह ज्यादा हो गया है तो देश में उन मसलो में दिखाए जो जरूरी है जिसकी देश को जरूरत है | उन कामो में जोश दिखाए जिससे देश का नाम हो और उनका भी | भारत और पाकिस्तान के मैच को सिर्फ खेल की नजर से और अपनी नजर से देखे न कि किसी और नजर से | मै क्या कहना चाह रही हु आप समझते है |
Thursday, March 10, 2011
मुखौटा
सबने मुखौटा लगा रखा है -
चेहरा असली छुपा रखा है |
खुल कर क्यों नही हँसते है -
क्यों दिल में गम रखते है |
करके झूठी-झूठी बाते -
खुद कों खुद से छलते है |
चिड़ते कुड़ते रहते है -
किसी से कुछ नही कहते है |
मुखौटे से काम चला रहे है -
खुद कों खुद से छिपा रहे है |
चेहरा असली छुपा रखा है |
खुल कर क्यों नही हँसते है -
क्यों दिल में गम रखते है |
करके झूठी-झूठी बाते -
खुद कों खुद से छलते है |
चिड़ते कुड़ते रहते है -
किसी से कुछ नही कहते है |
मुखौटे से काम चला रहे है -
खुद कों खुद से छिपा रहे है |
मन
मन कितना चंचल है यारो -
जितना पकड़ो उतना भागे |
छोड़ दिया मैने अब इसको -
इसकी किस्मत इसके हवाले |
बाधो कभी न मन कों मन से -
बाधा तो पछताओगे |
उड़ने दो मन कों मगन में -
देखो तुम मुस्काओगे |
जितना पकड़ो उतना भागे |
छोड़ दिया मैने अब इसको -
इसकी किस्मत इसके हवाले |
बाधो कभी न मन कों मन से -
बाधा तो पछताओगे |
उड़ने दो मन कों मगन में -
देखो तुम मुस्काओगे |
Monday, March 7, 2011
पगली प्रीत
पगली प्रीत
तुम क्या जानो तुमने कितना -
मेरा दिल दुखाया है |
फिर भी तुमको समझ के अपना -
सब-कुछ हमने भुलाया है |
तुमने जाने-अनजाने में कभी -
हमको हँसाया था |
आज उसी हँसी के बदले -
सौ-सौ आसू रुलाया है |
बहुत कुछ सीख रहे है जग से -
कुछ सीख लिया तुमसे |
कितने सीधे सरल थे हम -
आज समझ में आया है |
तुम क्या जानो चाँद -चांदनी ,
टीम-टीम तारे प्यार-विश्वाश |
जिसे चाँद में सिर्फ दूर से -
दाग ही नंजर आया है |
बहुत आसां होता है भँवरे -
कलियों में इतराना -मडराना |
कभी किसे कली का प्यार -
तुझको ना समझ आया है |
हसना तो हम भूल गए थे -
रोना भी आता है कम |
आज उसे पलको पे उठाकर -
बहुत आसू बहाया है |
क्रमशा
तुम क्या जानो तुमने कितना -
मेरा दिल दुखाया है |
फिर भी तुमको समझ के अपना -
सब-कुछ हमने भुलाया है |
तुमने जाने-अनजाने में कभी -
हमको हँसाया था |
आज उसी हँसी के बदले -
सौ-सौ आसू रुलाया है |
बहुत कुछ सीख रहे है जग से -
कुछ सीख लिया तुमसे |
कितने सीधे सरल थे हम -
आज समझ में आया है |
तुम क्या जानो चाँद -चांदनी ,
टीम-टीम तारे प्यार-विश्वाश |
जिसे चाँद में सिर्फ दूर से -
दाग ही नंजर आया है |
बहुत आसां होता है भँवरे -
कलियों में इतराना -मडराना |
कभी किसे कली का प्यार -
तुझको ना समझ आया है |
हसना तो हम भूल गए थे -
रोना भी आता है कम |
आज उसे पलको पे उठाकर -
बहुत आसू बहाया है |
क्रमशा
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